गर्भवतियों व किशोरियों के लिए मिसाल बनी गीता

लालगंज ,17 फरवरी जिला रायबरेली के लालगंज विकासखंड के गाँव शोभवापुर की रहने वाली गीता स्नातक के अंतिम वर्ष में हैं | वह गावों में राजीव गांधी महिला विकास परियोजना के अंतर्गत आंतरिक सामाजिक पूंजी( आईएससी) के रूप में काम कर रही हैं जहां वह समुदाय को महिला व बाल स्वास्थ्य को लेकर जागरूक कर रही है | वह इस परियोजना से पिछले एक साल से जुड़ी है |
गीता समाज के लिए कुछ करना चाहती है | उसका कहना है कि कुछ समय पहले तक गाँव में घर पर ही प्रसव होते थे, लोग टीकाकरण कराने में आना कानी करते थे किन्तु अब ऐसा नहीं है | अब सभी लोग अस्पताल में ही प्रसव कराते हैं | यह सब संभव हुआ है आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा लोगों को प्रोत्साहित करने से और कार्यक्रम के बारे में लोगों को बताने से |
गीता ने बताया कि इस क्षेत्र में राजीव गांधी महिला विकास परियोजना संचालित है जो कि सामुदायिक स्तर पर सरकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग करती है| उसकी माँ राजीव गांधी महिला विकास परियोजना द्वारा संचालित समूह की सदस्य हैं | वह भी माँ को देख कर समूह से जुड़ी | उसने भी अन्य किशोरियों के साथ मिलकर खुशी युवा स्वयं सहायता समूह का गठन किया | वह समूह की कोषाध्यक्ष हैं तथा समूह के सदस्यों द्वारा प्रति माह 20 रुपए का संचयन किया जाता है | परियोजना के अधिकारियों द्वारा जब यह बताया गया कि वे गाँव में महिला व बाल स्वास्थय पर आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से लोगों को जागरूक करना चाहते हैं तब उसने स्वयं ही पहल की और लोगों को जागरूक करने का
बीड़ा उठाया |

गीता ने बताया कि पहले वह जब लोगों के घर जाती थी तब घर के पुरुष व बुजुर्ग महिलाएं कहती थीं कि अब तुम हमें बताओगी कि हमको गर्भवती, धात्री व बच्चे की देखभाल कैसे करनी है ? “लेकिन मैनें हार नहीं मानी मैं बार बार जाती और अपनी बात को दृढ़ता से उनके सामने रखती | ऐसा करने से घर की बुजुर्ग महिलाओं ने मुझे सुनना शुरू किया और किसी के द्वारा बीच में बोलने पर कहतीं कि आई है, उसको सुन तो लो, कुछ अच्छा ही बताएगी|” लेकिन अब सभी महिलाएं उसकी बातों को ध्यान से सुनती हैं और उनकी बातों को अमल में लाती हैं | “पहले मैं
आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ घरों में जाती थी किन्तु अब मैं अकेले ही जाती हूँ और मुझे हिचक भी महसूस नहीं होती है,’’ गीता बताती है | गीता कहती है कि वे आशा व आंगनवाड़ी के रजिस्टर से लाभार्थियों का चुनाव करने के साथ ही स्वयं भी दायरा मैप के द्वारा उन घरों का चुनाव करती हैं जहां पर गर्भवती व धात्री महिलाएं , नवजात शिशु, 0-6 माह तक के व 6-माह से लेकर 2 वर्ष तक के बच्चे हैं | फिर वे इन घरों में भ्रमण कर परिवार को महिलाओं व बच्चों को पोषण व स्वास्थ्य संबंधी संदेश तथा सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी देती हैं |

गीता ने बताया कि वे अपने समूह के साथ प्रति सप्ताह बैठक करती हैं | इन बैठकों में वे लड़कियों को माहवारी स्वच्छता, खान पान ऐसा लें कि जिससे शरीर स्वस्थ हो व खून की कमी न हो, के बारे में बताती हैं | वे लड़कियों को आत्म रक्षा के लिए टिप्स देती हैं ताकि लड़कियां आत्म निर्भर बन सकें तथा अकेले घर से बाहर निकलने में डरें नहीं | यह इसके साथ ही साथ बचत के महत्व पर भी बात करती हैं कि छोटी-छोटी बचत कर के ही हम मुसीबत के समय एक दूसरे की सहायता करते हैं | गीता का कहना है कि राजीव गांधी महिला विकास परियोजना की वे बहुत शुक्रगुजार हैं कि इसके माध्यम से उन्हें समाज के लिए कुछ करने का मौका मिला | पहले जहां उन्हें किसी से बात करने में हिचक व शर्म महसूस होती थी अब वे आत्मविश्वास के साथ बात करती हैं | उन्हें आत्म रक्षा, बचत करने व स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए प्रशिक्षण जिला रायबरेली में मिला |

“इस परियोजना के सहयोग से ही मैं इस गाँव से बाहर जा पायी और आज मेरी एक पहचान है | इस गाँव में लोग मुझे मेरे नाम से जानते हैं,’’ गीता कहती है |

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