गोदभराई के जरिये गर्भवती हो रहीं सुपोषित

पाँच प्रकार के भोजन व आयरन-कैल्शियम की गोलियों के बताए जा रहे फायदे बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए अन्नप्राशन कर दिये जा रहे जरूरी टिप्स

लालगंज (रायबरेली), 13 फरवरी-2019। ग्रामीण क्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों के जरिये मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की पूरी कोशिश की जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासों के साथ ही राजीव गांधी महिला विकास परियोजना भी इस दिशा में उनसे कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है। इसके तहत ग्राम पँचायतों में गठित महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिये गोदभराई और अन्नप्राशन के कार्यक्रम आयोजित कर गर्भवती और शिशुओं को सुपोषित रखने के जरूरी टिप्स दिये जा रहे हैं। इसके साथ ही यह संदेश भी दिया जा रहा है कि नवजात के लिए माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध अमृत के समान होता है, जिसे बच्चे के जन्म के पहले घंटे के भीतर अवश्य पिलाएँ।लालगंज के शोभवापुर ग्राम पंचायत के प्राथमिक स्कूल के प्रांगण में राजीव गांधी महिला विकास परियोजना के तत्वावधान में आयोजित गोदभराई और अन्नप्राशन के कार्यक्रम को देखकर यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि सेहत को लेकर अब ग्रामीण महिलाओं में पूरी तरह से बदलाव की बयार बह रही है। गोदभराई के कार्यक्रम को एक जश्न का रूप देने के लिए पहले कलश पर दीपक जलाया गया फिर गर्भवती सरिता, दीपिका और सावित्री का माला पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद उनको एक थाली भेंट की गयी जो कि नारियल, हरी पत्तेदार सब्जियों, दूध के गिलास, दाल, रोटी, चावल, फल, अंडा और आयरन-कैल्शियम की गोलियों से परिपूर्ण थी। इसके साथ ही महिला के समूह में से मीना देवी (राजीव गांधी महिला विकास परियोजना द्वारा प्रशिक्षित) ने थाली में रखे सभी खाद्य पदार्थों के फायदे गिनाए और बताए कि इसी तरह का भोजन गर्भवती को प्रतिदिन करना है तभी माँ के स्वस्थ रहने के साथ ही बच्चा भी स्वस्थ पैदा होगा। गर्भवती को एक मिट्टी का गुल्लक भी दिया गया और बताया गया कि इसमें अभी से कुछ पैसे जमा करने की आदत डालो ताकि बच्चे के जन्म के समय यदि पैसे की जरूरत पड़े तो यह उसमें काम आ सके।

इसी मौके पर शबीना बानो की बेटी इबा के अन्नप्राशन का जश्न शुरू किया गया। इबा को खीर खिलाकर उनकी माँ को बताया गया कि बच्चे के छह माह के पूरा होने के बाद उसे समुचित शारीरिक विकास के लिए माँ के दूध के साथ ही साथ पूरक आहार की जरूरत होती है। पूरक आहार में बच्चे को दलिया, खीर, दाल, खिचड़ी, फल मसलकर दिया जाना चाहिए। 28 दिन पहले जन्में कार्तिक की माँ फूलमती को भी वहाँ मौजूद राजीव गांधी महिला विकास परियोजना की फील्ड ऑफिसर दयावती ने बताया कि बच्चे को छह माह तक केवल माँ का दूध पिलाना चाहिए ताकि वह किसी संक्रमण का शिकार न होने पाये।

क्या कहते हैं आंकड़े : नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के आंकड़ों के मुताबिक रायबरेली जिले में छह माह से पाँच साल तक के 60.2 फीसद बच्चों में खून की कमी है यानि उनका हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम से कम है। दूसरी ओर पाँच साल तक के 15.5 फीसद बच्चे अति कुपोषित (लंबाई के अनुपात में वजन) की गिरफ्त में हैं। इसके अलावा 15 से 49 साल साल तक की गर्भवती महिलाओं की बात करें तो इनमें 51 फीसद का हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम से नीचे है।

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