माया की सफल कहानी

मैं विकास ब्लाक महिला समूह बहादुरपुर, ग्राम पीढ़ी, माँ शारदा स्वयं सहायता समूह की सदस्य हूँ। मेरे परिवार में कुल 6 सदस्य हैं, पति, पत्नी और 4 बच्चे। मैं पढ़ी लिखी नहीं हूँ फिर भी हस्ताक्षर कर लेती हूँ। समूह से जुड़ने से पहले मेरे पास जमीन नहीं थी और न ही आजीविका का कोई साधन था। जब मैं समूह में जुड़ी तो मुझे समूह के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, समूह की बैठक में जाने से मुझे नई-नई जानकारी मिलने लगी, मेरे अंदर आत्मविश्वास बढ़ने लगा, फिर मैंने 3 बीघा जमीन अधिया पर लेकर सब्जी की खेती और अनाज उगाने लगी। मैंने समूह से पैसे लेने के बारे में अपने पति से बात की तो उन्होंने कहा ठीक है, पैसे लेकर कुछ रोजगार करते हैं। मैंने समूह से कुल 14000 रुपये , खेती के लिए लिया 4 बार ( 3000/, 5000/, 3000/, 3000 रुपये ), भैंस खरीदने के लिए , 20000 रुपये तथा पम्पसेट खरीदने के लिए 15000 रुपये लिया। समूह से मैंने कुल 6 बार में  49000 रुपये ऋण लिया। वर्तमान समय में मेरे पास आजीविका के दो मुख्य साधन है सब्जी की दुकान और दूध बेचने का तथा पम्पिंग सेट से पड़ोसियों के खेत की भी सिंचाई करते हैं। इस तरह से मेरे परिवार की आमदनी बढ़ी और गरीबी से बाहरआये। मेरे सभी बच्चे स्कूल जाते है। मेरे जीवन में अब कोई बन्धन नहीं है। मैं और मेरा परिवार बहुत खुश है तथा मेरा समूह अच्छे से चल रहा है।